Monday, 26 January 2015

भोजन करने सम्बन्धी जरुरी नियम

भोजन करने सम्बन्धी जरुरी नियम -

पांच अंगो ( दो हाथ , पैर , मुख ) को अच्छी तरह से धो कर ही भोजन करे !
 . गीले पैरों खाने से आयुमें वृद्धि होती है !
 . प्रातः और सायं ही भोजनका विधान है ! किउंकि पाचन क्रिया की जठराग्नि सूर्योदय से 2 घंटे बादतक एवं सूर्यास्त से 2 -3 घंटे पहले तक प्रवल रहती है
. पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुह करके ही खाना चाहिए !  
. दक्षिण दिशा की ओर कियाहुआ भोजन प्रेत को प्राप्त होता है !
  . पश्चिम दिशा की ओर किया हुआ भोजन खाने से रोग की वृद्धि होती है !
 . शैय्या पर , हाथ पर रख कर , टूटे फूटे वर्तनो मेंभोजन नहीं करना चाहिए  !
 . मल मूत्र का वेग होने पर,कलह के माहौल में,अधिक शोर में,पीपल,वट वृक्ष के नीचे,भोजन नहीं करना चाहिए !
  परोसे हुए भोजन की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए !
 १०. खाने से पूर्व अन्न देवता , अन्नपूर्णा माता की स्तुति कर के , उनका धन्यवाद देते हुए , तथा सभी भूखो को भोजन प्राप्त हो इस्वर से ऐसी प्राथना करके भोजन करना चाहिए !
 ११. भोजन बनने वाला स्नान करके ही शुद्ध मन से, मंत्र जप करते हुए ही रसोई में भोजन बनाये और सबसे पहले रोटिया अलग निकाल कर ( गाय , कुत्ता , और कौवे हेतु ) फिर अग्नि देव का भोग लगा कर ही घर वालो को खिलाये ! १२. इर्षा , भय , क्रोध, लोभ,रोग , दीन भाव,द्वेष भाव,के साथ किया हुआ भोजन कभी पचता नहीं है !
 १३. आधा खाया हुआ फल , मिठाईया आदि पुनः नहीं खानी चाहिए !
 १४. खाना छोड़ कर उठ जाने पर दुबारा भोजन नहीं करनाचाहिए !
 १५. भोजन के समय मौन रहे ! १६. भोजन को बहुत चबा चबा कर खाए !
 १७. रात्री में भरपेट खाए !
 १८. गृहस्थ को ३२ ग्रास सेज्यादा खाना चाहिए !
 १९. सबसे पहले मीठा , फिर नमकीन , अंत में कडुवा खाना चाहिए !
 २०. सबसे पहले रस दार , बीचमें गरिस्थ , अंत में द्राव्य पदार्थ ग्रहण करे!
 २१. थोडा खाने वाले को --आरोग्य , आयु , बल , सुख, सुन्दर संतान , और सौंदर्य प्राप्त होता है !
२२. जिसने ढिढोरा पीट कर खिलाया हो वहा कभी खाए !
 २३. कुत्ते का छुवा , रजस्वला स्त्री का परोसा, श्राध का निकाला , बासी , मुह से फूक मरकर ठंडा किया , बाल गिरा हुवा भोजन , अनादर युक्त , अवहेलना पूर्ण परोसा गया भोजन कभी करे !

 २४. कंजूस का, राजा का,वेश्या के हाथ का,शराब बेचने वाले का दिया भोजन कभी नहीं करना चाहिए यह नियम आप जरुर अपनाये और फर्क देख

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